Wednesday, April 29, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशस्वीकृत बजट का 95% खर्च, फिर भी अधूरा बीआरसी भवन

स्वीकृत बजट का 95% खर्च, फिर भी अधूरा बीआरसी भवन

रिपोर्ट: अखिलेश दास | ABN NEWS 247 | अखंड अवध | बाराबंकी |

बाराबंकी | विकास खंड सिरौलीगौसपुर के पीठापुर में खंड शिक्षा अधिकारी के सरकारी बीआरसी भवन का निर्माण कार्य गंभीर लापरवाही का उदाहरण बनता जा रहा है। स्वीकृत बजट का लगभग 95 प्रतिशत खर्च हो जाने और निर्धारित समय सीमा पूर्ण होने के बावजूद भवन अब तक अधूरा पड़ा है। जानकारी के अनुसार बीआरसी भवन निर्माण के लिए करीब 40 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था, जिसका कार्य आरईडी (ग्रामीण अभियंत्रण विभाग) को सौंपा गया था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक लगभग 38 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा है। वर्तमान स्थिति यह है कि भवन में फर्श, दरवाजे-खिड़कियां तथा अन्य आधारभूत सुविधाएं तक पूर्ण नहीं हो पाई हैं। बीते लगभग पांच महीनों से निर्माण कार्य में कोई ठोस प्रगति नहीं देखी गई है, जिससे भवन उपयोग के योग्य नहीं बन सका है। ऐसी स्थिति में खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का संचालन अन्य वैकल्पिक स्थानों पर करना पड़ रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं।

🔴 अधूरा भवन, गायब जवाबदेही

मौके पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। भवन में न तो फर्श पूरी तरह तैयार है, न ही दरवाजे-खिड़कियां लगी हैं। कई जगहों पर अधूरा प्लास्टर और कच्ची दीवारें साफ तौर पर निर्माण में लापरवाही की गवाही दे रही हैं। यह हाल तब है जब परियोजना की तय समय सीमा भी बीत चुकी है।

पिछले पांच महीनों से निर्माण कार्य लगभग ठप पड़ा हुआ है, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद काम पूरा क्यों नहीं हुआ?

⚠️ शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर

इस अधूरे भवन का सबसे बड़ा नुकसान शिक्षा व्यवस्था को हो रहा है। बीआरसी कार्यालय का संचालन मजबूरी में दूसरे वैकल्पिक स्थानों से किया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्य बाधित हो रहे हैं।
साथ ही, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।

🗣️ स्थानीय लोगों में आक्रोश

स्थानीय शिक्षकों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला है।

एक स्थानीय शिक्षक ने कहा:
“जब 95% पैसा खर्च हो गया तो भवन पूरा क्यों नहीं हुआ? आखिर जिम्मेदार कौन है?”

🔍 जांच की मांग तेज

अब इस मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि:

  • पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए

  • जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई हो

  • निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराया जाए

🚨 बड़ा सवाल — पैसा गया कहां?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब लगभग पूरा बजट खर्च हो चुका है, तो फिर काम अधूरा क्यों है?
क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है?

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