बिहार कांग्रेस में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर चल रहे विवाद के बीच अनुशासन समिति ने 29 नेताओं को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर 8 सितंबर को हुए धरना प्रदर्शन को लेकर की गई है। प्रदर्शन में शामिल नेताओं पर पार्टी नेतृत्व और बिहार कांग्रेस के खिलाफ विरोध जताने का आरोप है। अब इन सभी नेताओं को पार्टी की अनुशासन समिति के सामने अपना पक्ष रखना होगा और इसके लिए उन्हें 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद बिहार कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, 8 सितंबर को दिल्ली में कांग्रेस के पार्टी कार्यालय के बाहर बिहार कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन करने वाले नेताओं ने पार्टी के भीतर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। बताया जा रहा है कि बिहार कांग्रेस में संगठन और नेतृत्व को लेकर लंबे समय से असंतोष की स्थिति बनी हुई है। इसी नाराजगी ने अब दिल्ली तक पहुंचकर पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन का रूप ले लिया। पार्टी नेतृत्व ने इस प्रदर्शन को गंभीरता से लिया और इसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
कांग्रेस की अनुशासन समिति ने प्रदर्शन में शामिल 29 नेताओं को शो-कॉज नोटिस भेजा है। नोटिस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव की ओर से जारी किया गया है। नोटिस मिलने के बाद अब सभी संबंधित नेताओं से यह पूछा गया है कि उन्होंने पार्टी अनुशासन के खिलाफ जाकर प्रदर्शन क्यों किया। नेताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब देना होगा। उन्हें 72 घंटे का समय दिया गया है और इस अवधि में जवाब नहीं देने पर पार्टी की ओर से आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के भीतर अगर किसी मुद्दे को लेकर असहमति होती है तो उसे संगठन के मंच पर उठाने की कोशिश की जाती है, लेकिन जब नेता सीधे पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हैं तो मामला अनुशासन से जुड़ जाता है। यही वजह है कि कांग्रेस की अनुशासन समिति ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नोटिस पाने वाले 29 नेता अपने बचाव में क्या जवाब देते हैं।
शो-कॉज नोटिस जारी होने के बाद पार्टी के अंदर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक तरफ पार्टी नेतृत्व इसे अनुशासन बनाए रखने की कार्रवाई के तौर पर देख सकता है, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शन में शामिल नेताओं के लिए यह कार्रवाई उनके असंतोष को और ज्यादा राजनीतिक मुद्दा बना सकती है। अगर नेता अपने जवाब में पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी शिकायतों और आरोपों को विस्तार से रखते हैं तो बिहार कांग्रेस के अंदर चल रहे मतभेद और स्पष्ट होकर सामने आ सकते हैं।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से जारी नोटिस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 72 घंटे की समय सीमा है। इन नेताओं को तय समय के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने दिल्ली में पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन क्यों किया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। इसके बाद अनुशासन समिति उनके जवाबों का परीक्षण करेगी और जरूरत पड़ने पर आगे का फैसला लिया जा सकता है।
बिहार की राजनीति में कांग्रेस के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में प्रदेश स्तर के नेताओं के बीच खुलकर सामने आया असंतोष पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है। अब देखना होगा कि 29 नेताओं के जवाब के बाद कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को किस तरह सुलझाता है। क्या नेताओं की शिकायतों पर बातचीत होगी या फिर अनुशासनात्मक कार्रवाई आगे बढ़ेगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन ने बिहार कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है और 72 घंटे की समय सीमा ने पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया है।
![]()



