मिर्जापुर: फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रहे 4 बांग्लादेशी गिरफ्तार, मोबाइल व अहम कागजात बरामद
मिर्जापुर जनपद में अवैध रूप से निवास कर रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना कोतवाली कटरा पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहे चार बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से चार मोबाइल फोन के साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बांग्लादेशी वोटर आईडी और पासपोर्ट शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक के निर्देश पर जनपद में अपराधियों की धरपकड़, संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान और वाहनों की सघन चेकिंग के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक नगर और क्षेत्राधिकारी नगर के नेतृत्व में थाना कोतवाली कटरा पुलिस टीम क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही थी।
दिनांक 6 अप्रैल 2026 को पुलिस टीम रेलवे स्टेशन मिर्जापुर के आसपास गश्त कर रही थी, तभी एक संदिग्ध व्यक्ति पर पुलिस की नजर पड़ी। पूछताछ करने पर उसने अपना नाम मो. सबूज हुसैन पुत्र मो. समसुलहक निवासी दिनाजपुर, थाना पीरगंज, जिला ठाकुरगांव (रंगपुर, बांग्लादेश) बताया। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि उसका भाई सब्बीर हुसैन उसे और दो अन्य साथियों को बांग्लादेश से भारत लेकर आया है और वे सभी मिर्जापुर के डगमगपुर पड़री क्षेत्र में एक क्रेशर प्लांट पर काम कर रहे हैं। अभियुक्त की निशानदेही पर पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बताए गए स्थान पर छापेमारी की। वहां से तीन अन्य अभियुक्तों—सब्बीर हुसैन, नरेश दास और जय दास—को गिरफ्तार किया गया। सभी अभियुक्त बांग्लादेश के अलग-अलग क्षेत्रों के निवासी हैं और पिछले कुछ समय से अपनी असली पहचान छिपाकर मिर्जापुर में रह रहे थे।
पुलिस ने जब इन चारों के पास से बरामद मोबाइल फोन की जांच की, तो उसमें कई फर्जी दस्तावेजों से संबंधित जानकारी मिली। बरामद दस्तावेजों में भारत के आधार कार्ड और पैन कार्ड भी शामिल हैं, जिन्हें आरोपियों ने फर्जी तरीके से बनवाया था। जांच में यह भी सामने आया कि इन लोगों ने बिहार के कैमूर जिले के एक गांव के पते का इस्तेमाल कर अपने दस्तावेज तैयार कराए थे, ताकि वे भारत में आसानी से रह सकें और काम कर सकें। पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने बताया कि वे बांग्लादेश से दलालों को पैसे देकर अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे। उन्होंने नदी और सीमा पार कर पहले पश्चिम बंगाल के रायगंज पहुंचे, फिर कालियागंज रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़कर उत्तर प्रदेश के आगरा पहुंचे। वहां कुछ समय तक काम की तलाश करने के बाद वे मिर्जापुर आ गए और यहां एक क्रेशर प्लांट पर काम करने लगे। अभियुक्तों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी बांग्लादेशी पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए थे। सब्बीर हुसैन और मो. सबूज ने मुख्य भूमिका निभाते हुए सभी के लिए आधार और पैन कार्ड बनवाए, जिससे वे बिना किसी शक के स्थानीय स्तर पर रह सकें और रोजगार प्राप्त कर सकें।
इस मामले में थाना कोतवाली कटरा में मुकदमा संख्या 94/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2)—के साथ-साथ नागरिकता अधिनियम की धारा 2/17 और अप्रवास व विदेशियों से संबंधित अधिनियम की धारा 3/21 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन आरोपियों की मदद करने वाले स्थानीय लोग या दलाल कौन हैं, और फर्जी दस्तावेज बनाने में किन-किन की भूमिका रही है। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि जनपद में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहचान छिपाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई संदिग्ध व्यक्ति रह रहा हो, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। यह कार्रवाई न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट संदेश गया है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे अवैध रूप से भारत में रहना अब आसान नहीं होगा। पुलिस की इस सफलता से जनपद में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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