IGRS शिकायतों के निस्तारण में फर्जी गवाहों का खेल
मिर्जापुर।जनपद मिर्जापुर के देहात कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत बरकछा चौकी से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें आईजीआरएस (Integrated Grievance Redressal System) के निस्तारण में कथित फर्जीवाड़े का आरोप लगाया जा रहा है। यह मामला सीधे तौर पर शासन की उस प्राथमिकता पर सवाल खड़ा करता है, जिसमें आम जनता की शिकायतों का पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, बरकछा चौकी पर तैनात दारोगा रमाशंकर यादव पर आरोप है कि वह आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में फर्जी गवाहों का सहारा लेते हैं। बताया जा रहा है कि कई मामलों में बिना वास्तविक जांच किए, कागजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए काल्पनिक या मनगढ़ंत गवाह खड़े कर दिए जाते हैं और उसी आधार पर शिकायतों का निस्तारण दिखा दिया जाता है। इससे न केवल शिकायतकर्ता को न्याय नहीं मिल पाता, बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक-दो मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग शिकायतों में इसी तरह का तरीका अपनाया गया है। कई शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनकी शिकायतों का निस्तारण उनकी जानकारी के बिना ही कर दिया गया, और जब उन्होंने स्थिति की जानकारी ली तो पता चला कि गवाहों के नाम पर ऐसे लोगों को दिखाया गया है, जिनका मामले से कोई लेना-देना ही नहीं था। एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दारोगा रमाशंकर यादव कई वर्षों से एक ही चौकी पर तैनात हैं। आमतौर पर पुलिस विभाग में समय-समय पर स्थानांतरण की प्रक्रिया होती है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या स्थानीय प्रभाव से बचा जा सके। लेकिन बरकछा चौकी को “मालदार चौकी” माना जाता है, और यही वजह बताई जा रही है कि यहां लंबे समय से एक ही अधिकारियों की तैनाती बनी हुई है। वर्तमान में इस चौकी पर दो दारोगा तैनात हैं, जो अपने आप में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुख्यमंत्री द्वारा आईजीआरएस को प्राथमिकता दिए जाने के बावजूद, यदि इस तरह के फर्जी निस्तारण हो रहे हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही है बल्कि शासन की मंशा के विपरीत भी है। आईजीआरएस का उद्देश्य आम नागरिकों को उनकी शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष समाधान प्रदान करना है, लेकिन जब निस्तारण ही संदिग्ध तरीके से किया जाएगा, तो लोगों का भरोसा इस प्रणाली से उठना स्वाभाविक है। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर उच्च अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा तेजी से तूल पकड़ रहा है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।
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