BRICS Summit में खाद्य सुरक्षा और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। BRICS नेताओं ने पूरे समूह के लिए एक विशेष अनाज व्यापार मंच और किसानों पर केंद्रित चार नई कृषि पहलों को मंजूरी दी है। इन फैसलों का मकसद वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में होने वाले तेज उतार-चढ़ाव के असर को कम करना है।
नई दिल्ली घोषणा के तहत जिन चार प्रमुख पहलों को आगे बढ़ाया गया है, उनमें कृषि-इनपुट और सूचना से जुड़ा BRICS AGRIN नेटवर्क, बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच, कृषि-पारिस्थितिकी पर उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क और डिजिटल कृषि नेटवर्क शामिल हैं। इन पहलों को पहले कृषि मंत्रियों के स्तर पर आगे बढ़ाया गया था, लेकिन अब इन्हें राष्ट्राध्यक्षों के स्तर पर भी औपचारिक समर्थन मिल गया है।
भारत ने BRICS की अपनी अध्यक्षता के दौरान खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर सिर्फ चर्चा करने के बजाय ठोस कदम उठाने पर जोर दिया है। BRICS देशों का वैश्विक कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में इन देशों के बीच बेहतर कृषि सहयोग से उत्पादन, खाद्य उपलब्धता और किसानों की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
BRICS के प्रस्तावित अनाज व्यापार मंच को लेकर भी काम शुरू किया गया है। समूह इस बात पर विचार कर रहा है कि BRICS Grain Exchange किस तरह काम करेगा। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अनाज के व्यापार को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करना और बाजार में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद करना है। भविष्य में इस व्यवस्था को दूसरे कृषि उत्पादों और जिंसों तक भी विस्तार देने की संभावना रखी गई है।
खाद्य कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी और आपूर्ति में रुकावट भी BRICS देशों के लिए बड़ी चुनौती है। उर्वरकों की कमी जैसी परिस्थितियां खेती की लागत और उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में नेताओं ने खाद्य उपलब्धता, पहुंच, वहनीयता और स्थिरता में सुधार के लिए राष्ट्रीय नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया है।
घोषणा में राष्ट्रीय खाद्य भंडार प्रणालियों और जलवायु-अनुकूल बीज प्रणालियों जैसे उपायों को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। बदलते मौसम और जलवायु संकट के बीच ऐसी कृषि व्यवस्था विकसित करने की जरूरत महसूस की जा रही है, जिससे किसानों की उत्पादकता बनी रहे और खाद्य आपूर्ति पर संकट कम हो।
BRICS AGRIN को सहयोगात्मक, गैर-बाध्यकारी और किसान-केंद्रित व्यवस्था के रूप में विकसित करने पर सहमति बनी है। इसके जरिए कृषि-इनपुट, आनुवंशिक संसाधनों और कृषि से जुड़ी जानकारी के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिश होगी। वहीं बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों से जुड़े वैश्विक मंच का उद्देश्य पारंपरिक कृषि ज्ञान को दर्ज करना और देशों के बीच उसका आदान-प्रदान बढ़ाना है।
कृषि-पारिस्थितिकी और रीजेनरेटिव कृषि पर उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क भी इस पहल का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ लंबे समय तक उत्पादकता बनाए रखने में मदद करें। इसके साथ डिजिटल कृषि नेटवर्क के जरिए खेती में तकनीक और डिजिटल समाधानों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी। इसका दायरा कृषि-वानिकी, मछली पालन और जलीय कृषि तक भी रखा गया है।
नई दिल्ली घोषणा में छोटे और पारिवारिक किसानों के साथ पशुपालकों, मछुआरों, एक्वाकल्चर उत्पादकों, आदिवासी समुदायों, महिलाओं और युवाओं को कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में महत्वपूर्ण हिस्सेदार माना गया है। साथ ही BRICS देशों के बीच कृषि उत्पादों और कृषि-इनपुट के व्यापार को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
कुल मिलाकर BRICS Summit में कृषि को लेकर हुए ये फैसले सिर्फ अनाज व्यापार तक सीमित नहीं हैं। इनके जरिए खाद्य सुरक्षा, किसान अधिकार, डिजिटल खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि और कृषि व्यापार को एक साथ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। अब चुनौती इन पहलों को जमीन पर लागू करने की होगी, ताकि BRICS देशों के किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।
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