Wednesday, November 4, 2026
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फीस न जमा करने पर बच्चों को किया निलंबित, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर उठे सवाल

📰 बाराबंकी के टिकैत नगर में फीस न जमा करने पर बच्चों को किया निलंबित, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर बवाल

ब्यूरो रिपोर्ट : शिवम सिंह

बाराबंकी जिले के टेकाटनगर क्षेत्र से प्राइवेट स्कूलों की मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां फीस जमा न करने के कारण कई बच्चों को स्कूल से निलंबित कर दिया गया। इस घटना के बाद अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है और प्रशासन से कार्रवाई की मांग उठने लगी है।

लगातार बढ़ रही फीस और अतिरिक्त वसूली

मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित प्राइवेट स्कूल द्वारा छात्रों से विभिन्न मदों में भारी शुल्क वसूला जा रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि ट्यूशन फीस के अलावा किताब, बैग, यूनिफॉर्म और अन्य गतिविधियों के नाम पर भी अलग-अलग पैसे लिए जा रहे हैं। इससे आम और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

एक अभिभावक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “स्कूल में लगभग हर चीज के लिए पैसा लिया जा रहा है। किताब का पैसा, बैग का पैसा, गतिविधियों का पैसा—हर चीज के लिए अलग शुल्क देना पड़ता है। केवल पानी और शौचालय को छोड़ दिया जाए, तो बाकी हर सुविधा के लिए पैसे वसूले जा रहे हैं।”

फीस न जमा होने पर बच्चों को किया निलंबित

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कुछ परिवार आर्थिक कारणों से समय पर फीस जमा नहीं कर सके। आरोप है कि ऐसे करीब 12 बच्चों को स्कूल प्रबंधन ने अचानक निलंबित कर दिया। हैरानी की बात यह है कि यह कार्रवाई रात करीब साढ़े 11 बजे की गई, जिससे अभिभावकों में और अधिक आक्रोश फैल गया।

अभिभावकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। बिना किसी पूर्व सूचना या बातचीत के बच्चों को निलंबित करना पूरी तरह अनुचित है।

अभिभावकों ने की कार्रवाई की मांग

घटना के बाद प्रभावित परिवारों ने स्कूल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और प्रशासन से जांच व सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल एक स्कूल का मामला नहीं है, बल्कि क्षेत्र के कई निजी स्कूलों में इसी तरह की मनमानी देखने को मिल रही है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिकता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा सेवा का माध्यम होना चाहिए, लेकिन निजी स्कूल इसे व्यवसाय की तरह चला रहे हैं, जिससे आम लोगों की पहुंच शिक्षा से दूर होती जा रही है। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में सख्त नियम बनाए जाएं और किसी भी स्कूल को बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार करने से रोका जाए। साथ ही फीस संरचना को पारदर्शी बनाने और अतिरिक्त शुल्क पर नियंत्रण लगाने की भी जरूरत बताई जा रही है।अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या बच्चों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

 

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