चार वर्ष पुराने मामले में आया न्यायालय का फैसला
मिर्जापुर के अष्टभुजा पहाड़ी क्षेत्र में लगभग चार वर्ष पूर्व दर्ज हत्या के एक मामले में न्यायालय ने बिहार के तरारी विधानसभा क्षेत्र से विधायक नरेंद्र पांडेय उर्फ सुनील पांडेय सहित सभी आठ आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय का यह फैसला मुकदमे में उपलब्ध साक्ष्यों, अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद सुनाया गया।
बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने की पैरवी
मामले में बचाव पक्ष की ओर से बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राम कृष्ण द्विवेदी तथा वरिष्ठ अधिवक्ता बिहारी सिंह ने न्यायालय में पैरवी की। दोनों अधिवक्ताओं ने मुकदमे के दौरान अपने मुवक्किलों की ओर से दलीलें और कानूनी पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
न्यायालय ने सभी आरोपियों को किया दोषमुक्त
सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने अपने निर्णय में विधायक नरेंद्र पांडेय उर्फ सुनील पांडेय सहित सभी आठ आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय का निर्णय मुकदमे में प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर दिया गया।
सोशल मीडिया पर चल रहे दावों पर अधिवक्ता की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ अधिवक्ता राम कृष्ण द्विवेदी ने कहा कि इस मुकदमे की पैरवी को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार के दावे किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, उनकी जानकारी में कुछ दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मुकदमे में किस अधिवक्ता ने किस पक्ष की पैरवी की, इसका रिकॉर्ड न्यायालय की कार्यवाही में उपलब्ध होता है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।
कानूनी प्रक्रिया का सम्मान आवश्यक
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मुकदमे में न्यायालय का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और विधिक प्रक्रिया के आधार पर दिया जाता है। यदि किसी पक्ष को निर्णय से असहमति होती है, तो कानून के तहत उच्च न्यायालय में अपील करने का प्रावधान भी उपलब्ध रहता है।
निष्कर्ष
अष्टभुजा पहाड़ी हत्या प्रकरण में मिर्जापुर की सक्षम न्यायालय द्वारा बिहार के विधायक नरेंद्र पांडेय उर्फ सुनील पांडेय सहित सभी आठ आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। वहीं, मुकदमे की पैरवी को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे कुछ दावों पर वरिष्ठ अधिवक्ता राम कृष्ण द्विवेदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। न्यायालय के निर्णय और अभिलेख इस मामले में आधिकारिक आधार माने जाएंगे।
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