ABN NEWS 247 मोहम्मद फैसल सिद्दीकी
फतेहपुर बाराबंकी। मुसलमान सभी की भलाई करने वाली क़ौम है: मौलाना अमीनुल हक़ क़ासमी देश और मिल्लत की सुरक्षा एवं अस्तित्व के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद का इतिहास सदैव गौरवशाली रहा है। देश की आज़ादी में जमीयत के वरिष्ठ नेताओं (अकाबिरीन) ने अत्यंत समर्पण और उत्साह के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश के ज्वलंत मुद्दोंह के समाधान तथा रचनात्मक एवं संगठनात्मक कार्यों को सकारात्मक दिशा देने में जमीयत उलेमा-ए-हिंद हमेशा अग्रणी रही है। उक्त विचार जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के नाज़िम-ए-आला,मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी,नाज़िम मदरसा महमूदिया अशरफुल उलूम,कानपुर ने मदरसा शहाबुल उलूम,शहाबपुर,बाराबंकी में आयोजित एक विचार विमर्श बैठक को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मौलाना क़ासमी ने कहा कि मुसलमान सभी की भलाई करने वाली क़ौम है। जमीयत उलेमा की मजबूती के लिए स्थानीय और ज़िला इकाइयों का संगठित एवं सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है। केंद्रीय नेतृत्व और प्रांतीय पदाधिकारियों की यह सोच है कि सभी इकाइयाँ रचनात्मक,शैक्षिक,कल्याणकारी तथा सामाजिक सेवाओं को व्यवस्थित ढंग से संचालित करें और संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत बनाएँ। इसी उद्देश्य से प्रांतीय पदाधिकारी सभी ज़िलों का दौरा कर रहे हैं तथा संगठन को सुदृढ़ बनाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय एवं सजग करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा के कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर प्रत्येक सप्ताह, तहसील स्तर पर प्रत्येक पंद्रह दिन तथा ज़िला स्तर पर प्रत्येक माह परामर्श बैठक आयोजित करें और अपने कार्यों की समीक्षा करें। साथ ही दीनी तालीमी बोर्ड,समाज सुधार समिति,आदर्श मस्जिद योजना के अंतर्गत दर्स-ए-क़ुरआन,दर्स-ए-हदीस, मकतब कीय स्थापना तथा सद्भावना, जन विकास,जेम (JEM) और रफ़ीक़ जैसे विभागों को भी सक्रिय रूप से स्थापित किया जाए। उल्लेखनीय है कि इस बैठक का शुभारंभ मदरसा के शिक्षक कारी मुहम्मद फ़ज़ैल की कुरआन-ए-पाक की तिलावत तथा मसऊद आलम की नात-ए-पाक से हुआ बैठक की अध्यक्षता कारी मुहम्मद अल्लाह, अध्यक्ष जमीयत उलमा बाराबंकी ने की जबकि संचालन का दायित्व जमीयत उलेमा बाराबंकी के महासचिव मौलाना मोहम्मद जमाल क़ासमी ने निभाया। उन्होंने ज़िला एवं तहसील स्तर की इकाइयों की कार्यप्रणाली पर विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। ज़िला जमीयत के सचिव तथा जामिया दारुर्रशाद,बांकी के नाज़िम-ए-तालीमात मौलाना सैयद अज़हर क़ासमी ने अपने प्रारंभिक संबोधन में जमीयती एवं संगठनात्मक कार्यों के लाभ तथा जमीयत उलेमा-ए-हिंद के उद्देश्यों पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लाम,इस्लामी प्रतीकों (शआइर-ए-इस्लाम) की रक्षा तथा देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करना जमीयत उलेमा का मूल मिशन है। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल के साथ उत्तर प्रदेश जमीयत के सचिव कारी अब्दुल मुईद चौधरी, हाफ़िज़ उबैदुल्लाह बनारसी, मौलाना शादाब क़ासमी (मोहतमिम,मदरसा शिहाबुल उलूम), हाफ़िज़ एजाज़ अहमद, हाजी नियाज़ अहमद,प्रधान अनीस अफ़ज़ाल,मौलाना फ़ैज़ान नदवी (अध्यक्ष, तहसील रामसनेहीघाट),कारी शकील नदवी (दरियाबाद),कारी अहमदुल्लाह (सचिव),मौलाना रफ़ीक़ क़ासमी, एडवोकेट अहमद सईद फ़तेहपुरी (कानूनी सलाहकार, ज़िला जमीयत),एडवोकेट असलम, मुहम्मद सुहैल,मुहम्मद रियाज़, मुहम्मद रैहान, मौलाना नूर मुहम्मद क़ासमी,मौलाना सैयद मसऊद क़ासमी,कारी मुहम्मद शीस,मौलाना एहतिशाम क़ासमी, मौलाना सलमान नदवी, मौलाना मक़बूल क़ासमी,मुफ्ती राशिद क़ासमी,मौलाना फ़रमान मज़ाहिरी,मुफ्ती सालिम,कारी अशफ़ाक़,मौलाना ज़ैद नदवी (ख़ाज़िन,ज़िला जमीयत),कारी समीर साक़िबी (मोहतमिम, मदरसा दारुल अरक़म, जहाँगीराबाद),कारी जुनैद (मोहतमिम,मदरसा फ़ैज़ुल उलूम, आलापुर),कारी मुईन तथा विभिन्न गाँवों से आए अनेक सम्मानित लोगों ने भाग लिया। अंत में मौलाना शादाब क़ासमी ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा हाफ़िज़ उबैदुल्लाह बनारसी सेक्रेट्री जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश की दुआ के साथ बैठक का समापन हुआ।
रिपोर्ट मोहम्मद फैसल सिद्दीकी बाराबंकी
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