मसौली संवाददाता : आदर्श रावत
बाराबंकी जमीन कब्जेदारी विवाद का मामला क्या है?
बाराबंकी जनपद के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में जमीन कब्जेदारी का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक महिला अपनी ही जमीन पर हक पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जमीन उनके नाम खतौनी में दर्ज होने के बावजूद दबंग विपक्षियों ने उस पर अवैध कब्जा कर रखा है। प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह बाराबंकी जमीन कब्जेदारी विवाद अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
छुल्हा गांव का पूरा मामला
यह मामला जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के छुल्हा गांव का बताया जा रहा है। पीड़िता सरोज कश्यप के अनुसार उनकी कृषि भूमि उनके नाम पर खतौनी में दर्ज है, लेकिन हाज़िहार गांव के कुछ लोगों ने उस पर जबरन कब्जा कर लिया है। जब भी वह अपनी जमीन पर खेती करने या कब्जा हटाने की बात करती हैं, तो विपक्षी पक्ष उग्र हो जाता है और गाली-गलौज व मारपीट पर उतारू हो जाता है।
पीड़िता का आरोप है कि विपक्षियों ने उनकी जमीन पर जबरन फसल भी बो दी है। जब उनकी बेटी खेत पर खेती करने पहुंची, तो विपक्षी पक्ष की महिलाएं भी मौके पर पहुंच गईं और विवाद बढ़ गया। महिलाओं द्वारा डंडा लेकर डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया गया है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
पहले भी हो चुका था समझौता
पीड़िता सरोज कश्यप का कहना है कि इस मामले में पहले भी दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था। समझौते में यह तय हुआ था कि आगे केवल वही पक्ष खेती करेगा, जिसके नाम जमीन कागजों में दर्ज है। लेकिन समझौते के बावजूद विपक्षियों ने फिर से जमीन पर कब्जा कर लिया। इसके बाद विवाद और बढ़ गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया।
आरोपियों पर मुकदमा भी दर्ज
पीड़ित परिवार के मुताबिक राम सिंह, हंसराज, बृजेश, राम सिंह और सावित्री समेत कुछ लोगों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा भी दर्ज किया गया था। लेकिन इसके बावजूद जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया। पीड़िता का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी विपक्षियों के हौसले बुलंद हैं और वे लगातार जमीन पर कब्जा किए हुए हैं। यह पूरा बाराबंकी जमीन कब्जेदारी विवाद अब प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
प्रशासन से न्याय की गुहार
पीड़िता का कहना है कि उन्होंने न्याय के लिए कई बार प्रशासन और अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। एक ओर प्रदेश सरकार अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीन के कागज और खतौनी में नाम होने के बावजूद वह अपनी ही जमीन से वंचित हैं। पीड़िता और उनका परिवार लगातार तहसील और थाने के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अभी तक जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया है।
पुलिस का क्या कहना है?
इस पूरे मामले पर थाना अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद शुक्ल ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी और दोनों पक्षों को थाने पर बुलाया गया है। मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आत्मदाह की चेतावनी
न्याय न मिलने से हताश पीड़िता ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटाया गया, तो वह अपने खेत के सामने आत्मदाह करने को मजबूर होंगी। पीड़िता ने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। यह बयान सामने आने के बाद बाराबंकी जमीन कब्जेदारी विवाद और गंभीर हो गया है।
अब प्रशासन पर टिकी सबकी नजर
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार को उनका हक दिलाने के लिए ठोस कदम उठाता है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है। बाराबंकी में जमीन कब्जेदारी के इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर खतौनी में नाम होने के बावजूद लोगों को अपनी ही जमीन के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है।
![]()



