Wednesday, August 5, 2026
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सीतापुर में प्राथमिक विद्यालय सरैया मसूदपुर पर आरोप, बच्चों से पढ़ाई के बजाय कराया जा रहा श्रम

सीतापुर संवाददाता विकास चंद्र कश्यप

सीतापुर। जनपद के महमूदाबाद क्षेत्र से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सरैया मसूदपुर में आरोप है कि बच्चों से पढ़ाई कराने के बजाय श्रम कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों के अनुसार विद्यालय में शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों से “पाकरियां के पुलंगे” तुड़वाए जाने की बात कही जा रही है, जिसे लेकर व्यापक असंतोष और रोष देखने को मिल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय शिक्षा का केंद्र होता है, जहाँ बच्चों को ज्ञान, अनुशासन और संस्कार दिए जाते हैं। किंतु यदि वहीं बच्चों से शारीरिक श्रम कराया जाए, तो यह न केवल शिक्षा के उद्देश्य के विपरीत है बल्कि बच्चों के अधिकारों का भी उल्लंघन माना जा सकता है। अभिभावकों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को विद्यालय इसलिए भेजते हैं ताकि उनका शैक्षणिक और मानसिक विकास हो सके, न कि उनसे श्रम कराया जाए।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए अनेक योजनाएँ और कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं, मिड-डे मील, यूनिफॉर्म और डिजिटल शिक्षा जैसी व्यवस्थाओं पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसके बावजूद यदि किसी विद्यालय में इस प्रकार की गतिविधियाँ होती हैं, तो यह शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर भी सवाल उठाता है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस प्रकार की घटनाएँ बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ हैं। उनका मानना है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और शिक्षण-केंद्रित वातावरण मिलना चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की जा रही है।

मामले की चर्चा क्षेत्र में तेजी से फैल रही है और सामाजिक स्तर पर भी इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। लोगों की निगाहें अब प्रशासन और शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। आमजन यह जानना चाहते हैं कि क्या शासन-प्रशासन इस प्रकरण का संज्ञान लेकर जांच करेगा और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, या फिर यह मुद्दा अन्य मामलों की तरह समय के साथ दब जाएगा। फिलहाल, यह घटना शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता पर बहस छेड़ रही है। बच्चों के हितों की रक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना ही प्रशासन और समाज की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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