Kumbh Sankranti 2026: तिथि, मुहूर्त और पुण्यकाल का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार कुंभ संक्रांति का पर्व सूर्य देव के मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। इस दिन स्नान, दान और सूर्य पूजा का विशेष महत्व होता है।
🗓 तिथि और पुण्यकाल
13 फरवरी 2026 (फाल्गुन माह, कृष्ण पक्ष एकादशी) को कुंभ संक्रांति मनाई जाएगी।
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पुण्यकाल: सुबह 07:01 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
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महापुण्यकाल: सुबह 07:01 बजे से सुबह 08:53 बजे तक
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विशेष पुण्य क्षण: सुबह 04:14 बजे
धार्मिक मान्यता है कि महापुण्यकाल में गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने और इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।
🌞 सूर्य गोचर का समय
Surya 13 फरवरी 2026 को सुबह 04:04 बजे मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में गोचर करेंगे।
यह गोचर लगभग एक माह तक रहेगा और इसी के साथ कुंभ संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।
✨ शुभ योग और नक्षत्र
इस वर्ष कुंभ संक्रांति पर विशेष शुभ संयोग बन रहे हैं:
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शिववास योग
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सौभाग्य योग
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पूर्वाषाढ़ा और मूल नक्षत्र का संयोग
इन शुभ योगों में Vishnu और Lakshmi की पूजा करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
📿 कुंभ संक्रांति के नियम
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प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें।
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स्नान के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
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यदि पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं।
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सूर्य देव को जल अर्पित करें।
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जरूरतमंदों को दान अवश्य करें।
मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य करने से सूर्य देव की कृपा बनी रहती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
निष्कर्ष
Kumbh Sankranti 2026 आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन पुण्यकाल में स्नान, अर्घ्य और दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। शुभ योगों के कारण यह दिन और भी खास बन गया है।
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