बाराबंकी जनपद के मसौली क्षेत्र सहित आसपास की सड़कों पर डंपर अब लोगों के लिए ‘मौत का पहिया’ बनते जा रहे हैं। बीते तीन वर्षों में डंपर हादसों में 87 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद परिवहन विभाग और यातायात पुलिस प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम नजर आ रहे हैं। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत फतेहाबाद निवासी अधिवक्ता अजय कुमार सिंह द्वारा प्राप्त आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि बिना नंबर प्लेट, ओवरलोड और तेज रफ्तार से दौड़ते डंपर दिन-रात सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। खासतौर पर बाराबंकी-बहराइच हाईवे और गांवों को जोड़ने वाली सड़कों पर इनका खौफ साफ देखा जा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई डंपर चालक नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए बिना तिरपाल ढके मिट्टी का परिवहन करते हैं, जिससे हादसों का खतरा और बढ़ जाता है।
मसौली थाना क्षेत्र के आईमा बाजिदपुर के पास हो रहे मिट्टी खनन कार्य से जुड़े डंपर मलौली, किन्हौली और डफलिन पुरवा मार्ग से गुजरते हैं। यह सड़कें गांवों को जोड़ती हैं, जहां से रोजाना स्कूली बच्चे और आम नागरिक आवागमन करते हैं। स्थानीय निवासी नीरज कश्यप, संतोष यादव और श्याम सुंदर का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे डंपर चालकों के हौसले बुलंद हैं।
आरटीआई में सामने आए आंकड़ों के बाद अधिवक्ता अजय कुमार सिंह ने “सड़क खाली करो, डंपर आ रहे हैं—हटो या मरो” जैसा तीखा स्लोगन भी दिया है, जो हालात की भयावहता को बयां करता है।
वहीं, इस मामले में पीटीओ बाराबंकी रवि चंद्र त्यागी का कहना है कि रामनगर, कुर्सी और मसौली क्षेत्र में अभियान चलाकर कई बार चालान और अनफिट डंपरों को सीज किया गया है तथा शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है।
इसके बावजूद सवाल कायम है कि जब लगातार मौतें हो रही हैं, तो आखिरकार सख्त और स्थायी समाधान कब निकलेगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने और डंपरों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है, ताकि आगे और जानें न जाए
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