फरियादियों की परेशानी कम करने की पहल
मिर्जापुर में जिलाधिकारी पवन गंगवार ने जनसुनवाई की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इस प्रयोग का उद्देश्य उन लोगों को राहत पहुंचाना है, जो अपनी समस्या लेकर कई दिनों या कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद समाधान का इंतजार करते रहते हैं। अब जिलाधिकारी स्वयं फरियादियों की समस्याएं सुनने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारी को सीधे सामने जोड़कर मामले की जानकारी लेते हैं और समस्या के जल्द समाधान के लिए निर्देश देते हैं।
जनसुनवाई के दौरान फरियादी अपनी शिकायत लेकर जिलाधिकारी के सामने पहुंचते हैं। जिलाधिकारी उनकी बात ध्यान से सुनने के बाद मामले की प्रकृति के अनुसार संबंधित विभाग के अधिकारी से सीधे जानकारी लेते हैं। इसके लिए अपने लैपटॉप के माध्यम से सभी तहसीलों के उपजिलाधिकारियों यानी एसडीएम को जनसुनवाई से जोड़ा जाता है। इससे शिकायतकर्ता की समस्या को संबंधित अधिकारी तक पहुंचाने में लगने वाला अतिरिक्त समय कम हो जाता है।
लैपटॉप के जरिए सीधे जुड़ते हैं तहसीलों के एसडीएम
जिलाधिकारी के इस नए प्रयोग की सबसे खास बात यह है कि जनसुनवाई के दौरान जिले की सभी तहसीलों के एसडीएम से सीधे संपर्क किया जाता है। अगर किसी फरियादी की शिकायत किसी तहसील क्षेत्र से संबंधित है तो जिलाधिकारी मौके से ही संबंधित एसडीएम से मामले की जानकारी लेते हैं।
इस व्यवस्था में फरियादी को अलग से संबंधित अधिकारी के पास भेजने के बजाय जिलाधिकारी खुद संबंधित अधिकारी से बातचीत करते हैं। शिकायत की वास्तविक स्थिति जानने के बाद अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं। इससे फरियादी को यह जानकारी भी मिल जाती है कि उसकी शिकायत किस स्तर पर है और उसके समाधान के लिए आगे क्या कार्रवाई की जानी है।
कई दिनों से कार्यालयों के चक्कर लगाने वालों को राहत
प्रशासन की इस पहल का सबसे ज्यादा फायदा उन फरियादियों को मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। कई मामलों में शिकायतकर्ता को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजे जाने की स्थिति बन जाती है और समस्या का समाधान होने में काफी समय लग जाता है।
ऐसे मामलों में जिलाधिकारी की ओर से सीधे संबंधित अधिकारी से बात किए जाने पर शिकायत का जिम्मेदार विभाग और अधिकारी तुरंत सामने आ जाता है। इसके बाद जिलाधिकारी संबंधित अधिकारी से मामले की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हैं। इससे फरियादी को बार-बार अपनी समस्या दोहराने और अलग-अलग अधिकारियों के कार्यालय जाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।
समस्या सुनने के साथ समाधान पर जोर
आमतौर पर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित विभाग को भेजा जाता है और फिर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। मिर्जापुर में शुरू किए गए इस प्रयोग में शिकायत सुनने के साथ ही संबंधित अधिकारी से तत्काल जानकारी लेने पर जोर दिया जा रहा है।
जिलाधिकारी पवन गंगवार फरियादी की शिकायत सुनने के बाद यह जानने की कोशिश करते हैं कि मामला किस अधिकारी या विभाग से जुड़ा है। इसके बाद संबंधित अधिकारी से सीधे बातचीत कर वास्तविक स्थिति पूछी जाती है। यदि मामले में तत्काल कार्रवाई की जरूरत होती है तो उसी समय समाधान के लिए निर्देश दिए जाते हैं।
इससे जनसुनवाई की प्रक्रिया अधिक सीधी और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारी को भी यह स्पष्ट रहता है कि शिकायत जिलाधिकारी के संज्ञान में है और उस पर कार्रवाई की स्थिति की जानकारी आगे ली जा सकती है।
फरियादी और अधिकारी के बीच कम हो रही दूरी
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इससे फरियादी और संबंधित अधिकारी के बीच की दूरी कम होती है। कई बार आम लोगों को यह पता नहीं होता कि उनकी समस्या का समाधान किस विभाग या अधिकारी के स्तर से होगा। ऐसी स्थिति में वे अलग-अलग कार्यालयों में जाकर जानकारी लेने की कोशिश करते हैं।
अब जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी स्वयं संबंधित अधिकारी से बात करके शिकायत की दिशा स्पष्ट करते हैं। इससे फरियादी को सही अधिकारी तक पहुंचने में मदद मिलती है और प्रशासनिक प्रक्रिया को भी सरल बनाने की कोशिश होती है।
नया प्रयोग कितना प्रभावी होगा, इस पर नजर
मिर्जापुर में शुरू किया गया यह प्रयोग फिलहाल जनसुनवाई को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। इसका वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि निर्देश मिलने के बाद संबंधित अधिकारी कितनी तेजी से शिकायतों का निस्तारण करते हैं और फरियादियों को वास्तविक राहत कितनी जल्दी मिलती है।
फिर भी जिस तरह जिलाधिकारी जनसुनवाई के दौरान सीधे तहसील स्तर के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, उससे शिकायतों की तत्काल समीक्षा का रास्ता जरूर आसान हुआ है। खासतौर पर लंबे समय से लंबित मामलों में फरियादियों को उम्मीद है कि अब उनकी समस्या सिर्फ शिकायत दर्ज होने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संबंधित अधिकारी से उसी समय जवाब लेकर समाधान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।
मिर्जापुर प्रशासन की यह पहल अगर लगातार प्रभावी तरीके से लागू होती है तो इससे जनसुनवाई की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि फरियादी को अपनी समस्या के लिए बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उसे समय पर वास्तविक राहत मिले। फिलहाल जिलाधिकारी पवन गंगवार की यह पहल जनसुनवाई को सीधे समाधान से जोड़ने के प्रयास के रूप में सामने आई है।
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