वाराणसी। वाराणसी में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाए जाने के बाद केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। कोर्ट में सुनवाई के दौरान जहां कानूनी प्रक्रिया जारी थी, वहीं मठ परिसर में नियमित पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहा। आदेश स्वामी के पक्ष में आते ही भक्तों और वेदपाठी बटुकों ने अबीर-गुलाल और फूलों के साथ खुशी मनाई।
सुनवाई के बीच चर्चा में रही पूजा पद्धति
हाईकोर्ट में गिरफ्तारी पर सुनवाई के समानांतर श्रीविद्या मठ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा की जा रही पूजा भी चर्चा का विषय बनी रही। आदेश आने के बाद उनकी पूजा पद्धति और अनुष्ठान के वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। लोगों के बीच यह सवाल भी उठा कि आखिर कौन सा विशेष पूजन या अनुष्ठान किया गया, जिसके बाद फैसला उनके पक्ष में आया।
पंचपहर पूजन की परंपरा वर्षभर जारी
मठ प्रशासन के अनुसार श्रीविद्या मठ में प्रतिदिन पंचपहर पूजन की परंपरा निभाई जाती है। सुबह लगभग 4:45 बजे गणेश पूजा, 6:45 बजे सूर्य पूजा, 9:45 बजे विष्णु पूजा, 4:45 बजे शिव पूजन और शाम 6:45 बजे भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की आराधना होती है।
जिस समय न्यायालय का आदेश आया, उस समय स्वामी आदि विश्वेश्वर भगवान शिव की पूजा में लीन थे। मठ परिसर में कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जिनकी नियमित रूप से वैदिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा की जाती है।
आदेश के बाद हुआ पंचायतन पूजन
कोर्ट के फैसले के बाद शाम को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नियमित रूप से पंचायतन पूजन किया। इस पूजन में देवी राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी और चंद्र मौलीश्वर की विशेष आराधना शामिल रही।
मठ में वेदपाठी बटुकों को शास्त्र, वेद और वैदिक परंपराओं का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। पूजा के समय स्वामी स्वयं बटुकों और भक्तों के साथ उपस्थित रहते हैं, जबकि अन्य समय में विद्यार्थियों को वैदिक शिक्षा प्रदान की जाती है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में देर शाम तक भक्तों की भीड़ बनी रही। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक की खबर से धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
![]()



