ABN NEWS 247, मोहम्मद फैसल सिद्दीकी
रामसनेहीघाट बाराबंकी। श्रीराम कथा में अहिल्या उद्धार और असुर वध प्रसंग का हुआ मार्मिक वर्णन रामसनेहीघाट बाराबंकी कोटवा सड़क हथौंधा स्थित शुकुलन पुरवा में आयोजित श्रीराम महायज्ञ एवं सामूहिक कन्या महोत्सव के अंतर्गत चल रही श्रीराम कथा में शनिवार को आचार्य मोहित शुक्ला के नेतृत्व में कथा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान ऋषि विश्वामित्र द्वारा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा हेतु साथ ले जाने का प्रसंग सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे आचार्य ने बताया कि ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ में असुरों द्वारा बार-बार विघ्न डाला जा रहा था। इससे परेशान होकर वे अयोध्या पहुंचे और राजा दशरथ से श्रीराम व लक्ष्मण को अपने साथ भेजने का आग्रह किया। राजा दशरथ की अनुमति मिलने पर दोनों राजकुमार ऋषि के साथ यज्ञ की रक्षा के लिए प्रस्थान कर गए। मार्ग में ताड़का, सुबाहु और मारीच जैसे राक्षसों का सामना हुआ जिनका भगवान श्रीराम ने संहार किया मारीच को दूर तक मार भगाया गया। जिससे यज्ञ निर्विघ्न संपन्न हो सका कथा के आगे के प्रसंग में बताया गया कि यज्ञ पूर्ण होने के बाद ऋषि विश्वामित्र को मिथिला नरेश जनक का आमंत्रण प्राप्त हुआ। इसके पश्चात वे श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुर की ओर रवाना हुए। रास्ते में एक पत्थर की शिला देखकर श्रीराम ने जिज्ञासा प्रकट की, तब विश्वामित्र ने अहिल्या उद्धार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या को श्रापवश शिला बनना पड़ा था। भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श से वह पुनः अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट हो गईं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। कथा के इस मार्मिक प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक भाव से भर दिया। कार्यक्रम में भोलानाथ मिश्रा, राकेश वर्मा, तेज बहादुर सिंह, दिनेश शुक्ल सहित बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिलाओं ने भाग लेकर कथा का रसपान किया।
रिपोर्ट मोहम्मद फैसल सिद्दीकी बाराबंकी
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