बाराबंकी: जिला महिला अस्पताल में सक्रिय दलालों का जाल, गरीब मरीज हो रहे शिकार
रिपोर्ट: अखिलेश दास | ABN NEWS 247 | अखंड अवध | बाराबंकी |
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद स्थित जिला महिला अस्पताल एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। यहां इलाज के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में ले जाने का संगठित खेल सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल परिसर और उसके आसपास सक्रिय दलाल मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें महंगे निजी अस्पतालों की ओर मोड़ देते हैं, जिससे गरीब और ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं प्रसव और स्त्री रोग संबंधी उपचार के लिए पहुंचती हैं। इनमें अधिकांश महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों से आती हैं, जिन्हें अस्पताल की प्रक्रिया, डॉक्टरों की उपलब्धता और इलाज की व्यवस्था के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व अस्पताल परिसर के भीतर और बाहर सक्रिय रहते हैं।
ये दलाल खुद को अस्पताल कर्मचारी, वार्ड बॉय, या फिर “मददगार” बताकर मरीजों और उनके परिजनों से संपर्क करते हैं। बातचीत के दौरान वे सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाते हैं। मरीजों को डराया जाता है कि यहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, इलाज में बहुत समय लगेगा या प्रसव के दौरान गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में परिजन घबरा जाते हैं और जल्दी इलाज की उम्मीद में दलालों की बातों में आ जाते हैं। इसके बाद दलाल पास के निजी अस्पतालों का नाम लेकर वहां बेहतर और तुरंत इलाज का भरोसा दिलाते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि दलाल खुद ही एंबुलेंस या निजी वाहन की व्यवस्था कर मरीज को सीधे निजी अस्पताल पहुंचा देते हैं। बताया जाता है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ निजी अस्पतालों की भी मिलीभगत होती है, जहां से दलालों को कमीशन मिलता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। लंबे समय से अस्पताल के आसपास कुछ लोग इसी तरह की गतिविधियों में लिप्त हैं। बावजूद इसके, प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा सकी है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों में इसको लेकर नाराजगी और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। इस तरह की गतिविधियां न केवल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक शोषण का शिकार भी बनाती हैं। सरकारी अस्पताल में जहां मुफ्त या कम लागत पर इलाज उपलब्ध होना चाहिए, वहीं दलालों के कारण मरीजों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ जाते हैं।
बाराबंकी दौरे पर प्रभारी मंत्री सुरेश राही, स्कूल-अस्पताल-गौशाला का किया निरीक्षण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन को सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करनी होगी। अस्पताल परिसर में अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक, सीसीटीवी निगरानी, और हेल्प डेस्क की मजबूत व्यवस्था जैसे कदम जरूरी हैं। साथ ही, मरीजों को जागरूक करने के लिए सूचना बोर्ड और सार्वजनिक घोषणाएं भी की जानी चाहिए ताकि वे किसी भी तरह के बहकावे में न आएं।वहीं, जिला प्रशासन को भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करानी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले दलालों तथा संबंधित निजी अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है। फिलहाल, जरूरत इस बात की है कि जिला महिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को सुरक्षित और पारदर्शी चिकित्सा सेवाएं मिलें, ताकि वे बिना किसी भय और भ्रम के सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
![]()



