Thursday, November 5, 2026
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10 हजार के आगे झुकी इंसानियत डिलीवरी के दौरान महिला की मौत सीएचसी के बगल में मौत का नर्सिंग होम

ABN NEWS 247/मोहम्मद फैसल सिद्दीकी

जहांगीराबाद बाराबंकी। 10 हजार के आगे झुकी इंसानियत डिलीवरी के दौरान महिला की मौत तीन दिन बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं सीएचसी के बगल में मौत का नर्सिंग होम अपने पैर पसारे धड़ल्ले से जिंदगियों के साथ मौत का तांडव जारी स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठते कई अहम सवालो के घेरे में जिम्मेदार मौन आपको बताते चले कि प्राप्त जानकारी के अनुसार बाराबंकी में इलाज से पहले पैसे की मांग,देरी बनी जानलेवा अवैध नर्सिंग होम का खेल जारी मरीजों की जान पर भारी लापरवाही जिले में प्राइवेट नर्सिंग होम की मनमानी और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। जहांगीराबाद क्षेत्र के अजीमनगर गांव में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 45 वर्षीय शर्वरी,जो प्रसव पीड़ा से जूझ रही थीं। उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचीं थीं कि उन्हें नई जिंदगी मिलेगी। लेकिन आरोप है कि निजी नर्सिंग होम में इलाज शुरू करने से पहले पैसों की मांग ने उनकी जिंदगी छीन ली रविवार सुबह करीब 11 बजे गांव की एक महिला उन्हें माया नर्सिंग होम लेकर पहुंची। परिजनों का आरोप है कि नर्सिंग होम संचालक ने इलाज से पहले ₹10,000 की मांग रख दी। किसी तरह ₹3,000 जमा किए गए,ल लेकिन बाकी रकम न मिलने पर इलाज में देरी की गई। यही देरी शर्वरी के लिए जानलेवा साबित हुई। हैरान करने वाली बात यह है कि यह नर्सिंग होम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी से महज 10 मीटर की दूरी पर संचालित हो रहा है। आरोप है कि यहां न तो कोई पंजीकृत डॉक्टर है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ एक बीए पास युवक द्वारा पूरे नर्सिंग होम का संचालन किया जा रहा था। परिजनों के मुताबिक जब शर्वरी की हालत बिगड़ने लगी तो स्टाफ ने जिम्मेदारी लेने के बजाय उन्हें बाहर निकाल दिया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया तीन दिन बीत जाने के बाद भी न तो नर्सिंग होम सील हुआ और न ही किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई। इससे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आखिर सीएचसी के पास ही अवैध नर्सिंग होम कैसे संचालित हो रहे हैं। मृतका अपने पीछे पांच छोटे बच्चों को छोड़ गई हैं। एक महीने पहले ही उनकी बड़ी बेटी जीनत की शादी हुई थी। लेकिन अब घर में मातम पसरा है। थाना प्रभारी डीपी शुक्ला का कहना है कि परिजनों ने लिखित शिकायत नहीं दी है। जबकि सीएमओ डॉ. अवधेश कुमार ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन बराबर दे रहे हैं। आखिर कब होगी जांच और कब जिंदगी को मौत में बदलने वाले लोगों पर होगी कार्रवाई आखिर कितने मासूम को मां खोना पड़ेगा बड़ा सवाल यह है कि क्या गरीब की जिंदगी की कीमत सिर्फ ₹10,000 है और अगर अस्पताल के बगल में ही मौत का नर्सिंग होम चल रहा है तो जिम्मेदार कौन?

रिपोर्ट मोहम्मद फैसल सिद्दीकी बाराबंकी

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