विंध्याचल दूर दराज से मां विंध्यवासिनी दरबार में आने वाले समस्त भक्तों का सेवा करने से मन बड़ा प्रफुलित रहा करता है===श्रृंगारिया रघुवर उपाध्याय जी
विंध्याचल मां विंध्यवासिनी परिक्षेत्र अंतर्गत भक्तों के भक्ति मय रस में रम श्रृंगारिया रघुवर महाराज उपाध्याय जी विंध्य धाम चैरिटेबल ट्रस्ट माध्यम द्वारा इस तपती धूप में श्रद्धालुओं को ठंडी,,ठंडी शरबत वितरण कर करा इस गर्मी से राहत देने का कार्य निरंतर आपके उपस्थित माध्यम द्वारा हो रहा है जिसका सराहना श्रद्धालुओं द्वारा निरंतर हो रही हैं इसी के साथ ही दूर-दूर तक एक सुखद संदेश के रूप में श्रद्धालुओं के माध्यम द्वारा जाने का कार्य भी हो रहा है उपाध्याय जी ने कहा कि मां भगवती के दरबार प्रांगण में निरंतर ट्रस्ट द्वारा समय-समय पर श्रद्धालु के सुख सुविधा को ध्यान में रख इस तरह के पुनीत कार्य चलता रहता है आगे भी निरंतर इसी तरह मां भगवती की कृपा भक्ति शक्ति से चलता रहेगा करती है सब कुछ माता सिर्फ हम लोग एक कारक के रूप में नित्य धर्म कार्य करते चले चल रहे हैं भक्तों को किसी भी प्रकार से किसी भी तरह से कोई कष्ट ना हो पाव हम लोगों का जितना प्रयास बन पड़ता है संभवत हम लोग निरंतर श्रद्धालुओं के सेवा में खड़े रहते हैं मां विंध्यवासिनी के आने वाले समस्त भक्त जन देव सामान के रूप में देखे जाते हैं अतिथि देव सामान होते है सभी भक्तों पर मां की कृपा निरंतर बनी रहे स्वास्थ्य में मस्त रहें मां विंध्यवासिनी से निरंतर यही कामना आरती पूजन श्रृंगार में नित्य समय दे भगवती के समक्ष खड़े होकर किया करते हैं
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भास्कर भट्ट की कलम से
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