22 अगस्त को सिटी क्लब में सजेगा कजली महोत्सव का भव्य मंच
मीरजापुर। पूर्वांचल की समृद्ध लोक संस्कृति को नई पहचान देने और विलुप्त होती कजली परंपरा को संरक्षित करने के उद्देश्य से 22 अगस्त 2026 को मीरजापुर के सिटी क्लब में “तीसरा भव्य कजली उत्सव” आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन लोक संस्कृति संरक्षण केन्द्र द्वारा प्राचीन महादेव मंदिर बूढ़ेनाथ के अष्ट कौशल महंत डॉ. योगानंद महाराज के संरक्षण में किया जा रहा है।
लोक संस्कृति के संरक्षण का अनूठा प्रयास
लोक संस्कृति संरक्षण केन्द्र की निदेशक ऊषा गुप्ता ने बताया कि कजली, बिरहा और चैता जैसी लोक विधाएं पूर्वांचल की सांस्कृतिक धरोहर हैं, लेकिन बदलते समय में इनका दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। ऐसे में नई पीढ़ी को इन लोक परंपराओं से जोड़ने और लोक कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
देशभर के लोक कलाकार करेंगे प्रस्तुति
आयोजकों के अनुसार इस वर्ष के महोत्सव में मीरजापुर, सोनभद्र, भदोही, वाराणसी, गाजीपुर और बलिया सहित विभिन्न जिलों के प्रसिद्ध लोकगायक और लोकगायिकाएं अपनी प्रस्तुतियां देंगी। ग्रामीण महिलाओं द्वारा सामूहिक कजली गायन भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहेगा।
इसके अलावा पद्मश्री सम्मानित लोक कलाकारों तथा राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त कलाकारों की प्रस्तुतियां भी दर्शकों को देखने को मिलेंगी। ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम और नगाड़े जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर संगत के साथ कजली गायन कार्यक्रम को और भी आकर्षक बनाएगा।
कलाकारों का होगा सम्मान
महोत्सव में उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले लोक कलाकारों को सम्मान पत्र, शील्ड एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इससे लोक कलाकारों का उत्साह बढ़ेगा और पारंपरिक लोक गायन को नई पहचान मिलेगी।
रजिस्ट्रेशन कराया गया अनिवार्य
आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इच्छुक प्रतिभागियों को 18 अगस्त 2026 तक अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर निर्धारित व्हाट्सएप अथवा ई-मेल के माध्यम से भेजकर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क रहेगा।
संस्था ने स्पष्ट किया है कि प्रतिभागियों को यात्रा भत्ता या मानदेय नहीं दिया जाएगा, जबकि मंचीय प्रस्तुति के लिए आवश्यक वाद्ययंत्रों की व्यवस्था आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।
लोक संस्कृति संरक्षण और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
महोत्सव के सचिव संदर्भ पाण्डेय ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक आयोजन करना नहीं है, बल्कि लोक कलाकारों को प्रोत्साहित कर उन्हें व्यापक पहचान दिलाना और लोक गायन के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना भी है।
उन्होंने बताया कि महोत्सव के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं—
कजली जैसी लोक विधाओं का संरक्षण।
ग्रामीण एवं अंचल के कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराना।
लोक कलाकारों के लिए सम्मान और रोजगार के अवसर बढ़ाना।
पिछले दो वर्षों में मिला था अच्छा प्रतिसाद
आयोजकों के अनुसार पिछले दो वर्षों में आयोजित कजली महोत्सव को लोगों का व्यापक समर्थन मिला था। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में दर्शकों, लोक कलाकारों, विद्यार्थियों और संस्कृति प्रेमियों के शामिल होने की उम्मीद है।
भव्य तैयारियां जारी
सिटी क्लब में पारंपरिक पूर्वांचली थीम पर मंच सजाया जाएगा। प्रकाश, ध्वनि और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों के शामिल होने की संभावना है।
कार्यक्रम की जानकारी
दिनांक: 22 अगस्त 2026
समय: शाम 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक
स्थान: सिटी क्लब, मीरजापुर
आयोजकों ने लोक संस्कृति प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर पूर्वांचल की समृद्ध लोक परंपरा के संरक्षण में सहभागिता निभाने की अपील की है।
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