कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया है, लेकिन इस घोषणा के कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी ने चुनावी हलचल बढ़ा दी। आखिर क्या है पूरा मामला? दरअसल, ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इसके बाद ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उनका गुट नंदीग्राम से अब कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगा और कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान का समर्थन करेगा। ममता बनर्जी ने अपने फैसले को विपक्षी गठबंधन इंडिया के साथ एकजुटता से जोड़ते हुए कहा कि उनका खेमा मुकाबले के लिए तैयार है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। इस बीच, कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े एक पुराने मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने चुनावी मैदान से पीछे नहीं हटने की बात कही है। मामले में प्रधान के खिलाफ पुराने वारंट और गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है, जबकि गिरफ्तारी के समय को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। उधर, निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी गुट को फुटबॉल खिलाड़ी और दूसरे गुट को लिफाफे का चुनाव चिह्न मिला है। नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि उम्मीदवार की गिरफ्तारी, नामांकन वापसी और विपक्षी समर्थन के इस घटनाक्रम के बीच नंदीग्राम का चुनावी मुकाबला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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