Tuesday, November 3, 2026
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हिंदी के विकास से भारतीय भाषाओं के समन्वय तक, अमित शाह की पहल में क्या है खास?

नई दिल्ली। हिंदी के प्रचार-प्रसार से लेकर भारतीय भाषाओं के बीच संवाद और समन्वय तक, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की भाषा संबंधी पहल चर्चा में है। मूल रूप से गुजराती भाषी होने के बावजूद हिंदी में सार्वजनिक संवाद और सरकारी कामकाज को प्राथमिकता देने वाले अमित शाह हिंदी को प्रशासन, शिक्षा, विज्ञान और तकनीक से जोड़ने पर जोर देते रहे हैं। वर्ष 2019 में हिंदी दिवस के अवसर पर उन्होंने हिंदी को स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना से जोड़ते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया था। वहीं, वर्ष 2025 में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में हिंदी के संवर्धन से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया। पिछले एक वर्ष में राजभाषा विभाग ने भारतीय भाषाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए कई पहल की हैं। जून 2025 में भारतीय भाषा अनुभाग की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाना और उन्हें तकनीक तथा प्रशासन से जोड़ना है। इसके अलावा, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘नराकास प्रोत्साहन सम्मान’ की व्यवस्था शुरू की गई है। तकनीकी क्षेत्र में ‘भारती-बहुभाषी अनुवाद सारथी’ और ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ जैसी पहलें हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं के बीच अनुवाद तथा शब्दों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही हैं। हिंदी के विकास में हिंदीतर भाषी महापुरुषों का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है। स्वामी दयानंद सरस्वती ने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिंदी में लिखकर अपने विचार जनसाधारण तक पहुंचाए, जबकि महात्मा गांधी ने हिंदी को राष्ट्रीय संवाद और जनजागरण से जोड़ने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विभिन्न मंचों पर हिंदी और भारतीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित करते रहे हैं। अब सवाल है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन अनुवाद और डिजिटल प्रकाशन के इस दौर में हिंदी किस तरह ज्ञान-विज्ञान की भाषा के रूप में आगे बढ़ेगी? इसके लिए गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी सामग्री को हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराना जरूरी है। भारत की भाषायी विविधता के बीच हिंदी का विकास दूसरी भाषाओं के सम्मान और सहयोग के साथ आगे बढ़े, यही बहुभाषी भारत की प्रमुख आवश्यकता है।

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