मिर्जापुर। देश के विभाजन के दौरान विस्थापन, हिंसा और अपनों से बिछड़ने का दर्द झेलने वाले लोगों की स्मृति में शुक्रवार को मिर्जापुर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विभाजन के दौरान पीड़ित हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्ष और पीड़ा को याद किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और अन्य गणमान्य लोगों ने सहभागिता की। इस दौरान वक्ताओं ने विभाजन के समय लोगों द्वारा झेली गई कठिन परिस्थितियों को याद करते हुए देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाए रखने का संदेश दिया।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मड़िहान विधायक रमाशंकर सिंह पटेल, नगर विधायक रत्नाकर मिश्र, मंझवा विधायक शुचिस्मिता मौर्य और छानबे विधायक रिंकी कोल मौजूद रहीं। इनके साथ पिछड़ा आयोग के उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली और नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार वर्मा समेत कई अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विभाजन के पीड़ितों को याद करते हुए उन्हें नमन किया गया। इस मौके पर देश के इतिहास के उस दौर को स्मरण किया गया, जब बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा था। विभाजन के दौरान परिवारों के बिछड़ने और लोगों के सामने आई कठिन परिस्थितियों को भी याद किया गया।
विभाजन के पीड़ितों को किया गया नमन
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य उन लोगों की पीड़ा और संघर्ष को याद करना है, जिन्होंने देश के विभाजन के समय बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि इतिहास के इस अध्याय को याद रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उस दौर की घटनाओं और उससे जुड़े मानवीय पक्ष को समझ सकें।
वक्ताओं ने इस अवसर पर सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की मजबूती के लिए समाज में आपसी विश्वास, सद्भाव और एकजुटता जरूरी है। कार्यक्रम में लोगों से इतिहास से सीख लेते हुए भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न होने देने के लिए सामाजिक समरसता बनाए रखने का आह्वान किया गया।
इतिहास से सीख लेने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि विभाजन का दौर भारतीय इतिहास का बेहद संवेदनशील अध्याय रहा है। उस समय लाखों लोगों को अपने घरों और परिचित स्थानों से दूर जाना पड़ा। कई परिवारों ने अपनों को खोया और लंबे समय तक विस्थापन तथा असुरक्षा का सामना किया। ऐसे लोगों के संघर्ष और पीड़ा को याद करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को इतिहास के इन पहलुओं की जानकारी होनी चाहिए। इतिहास को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत की घटनाओं को दोहराना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर देश में शांति, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करना भी है।
एकता और अखंडता का दिया संदेश
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के कार्यक्रम में देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाए रखने का संदेश दिया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कहा कि भारत की विविधता उसकी विशेषता है और अलग-अलग समुदायों के बीच आपसी सम्मान तथा सहयोग लोकतांत्रिक समाज की मजबूती के लिए आवश्यक है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने विभाजन के दौरान पीड़ित हुए लोगों की स्मृति को नमन करते हुए सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया। इस दौरान यह संदेश भी दिया गया कि देश के विकास और मजबूत भविष्य के लिए सभी लोगों को मिलकर काम करना चाहिए।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के अलावा स्थानीय लोगों की भी मौजूदगी रही। कार्यक्रम के दौरान विभाजन के इतिहास और उससे जुड़े मानवीय पहलुओं को याद किया गया। उपस्थित लोगों ने पीड़ितों के प्रति सम्मान व्यक्त किया और उनके संघर्ष को स्मरण किया।
मिर्जापुर में आयोजित यह कार्यक्रम विभाजन के दौरान प्रभावित हुए लोगों की स्मृति को समर्पित रहा। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को इतिहास के इस संवेदनशील अध्याय से परिचित कराने और सामाजिक एकता का संदेश देने का प्रयास किया गया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने तथा देश की एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
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