सुशांत सिंह राजपूत की मौत के करीब छह साल बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में है। वजह है उनकी बहन श्वेता सिंह कीर्ति का नया वीडियो, जिसमें उन्होंने अपने भाई के पोस्टमार्टम को लेकर कुछ गंभीर दावे किए हैं। श्वेता ने दावा किया कि हाल ही में उन्हें पोस्टमार्टम करने वाले व्यक्ति से ऐसी जानकारी मिली, जिसमें सुशांत के शरीर पर चोटों का जिक्र था। उनके मुताबिक, उस व्यक्ति ने उन्हें बताया कि सुशांत का पैर टूटा हुआ था, आंखों पर चोट थी और शरीर पर काफी जोर लगाए जाने के निशान थे। श्वेता ने अपने वीडियो में गले पर बंदूक या स्टन गन के इस्तेमाल से जुड़े दावे का भी जिक्र किया। हालांकि, इन बातों को फिलहाल श्वेता सिंह कीर्ति के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने पोस्टमार्टम करने वाले व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया है और उपलब्ध जानकारी में इन नए दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। यही वजह है कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि श्वेता द्वारा बताई गई नई जानकारी और साल 2020 में सामने आए आधिकारिक पोस्टमार्टम निष्कर्षों के बीच क्या संबंध है। उस समय सार्वजनिक हुई पोस्टमार्टम संबंधी जानकारी में बाहरी चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिलने और मौत का कारण फांसी से हुई दम घुटने की स्थिति बताया गया था। रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि पोस्टमार्टम में किसी तरह के फाउल प्ले के संकेत नहीं मिले थे। अब श्वेता के ताजा बयान ने पुराने सवालों को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि, किसी भी नए दावे को तथ्य मानने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों, मेडिकल रिकॉर्ड और जांच एजेंसियों के निष्कर्षों से उसका मिलान करना जरूरी होगा। श्वेता ने अपने वीडियो में एक और महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने सुशांत के प्रशंसकों से नफरत, बदले और नाराजगी में डूबने के बजाय प्रेम, विश्वास और अच्छाई के रास्ते पर चलने की बात कही। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्याय की मांग करना अलग बात है और बदले की भावना रखना अलग। सुशांत सिंह राजपूत का निधन 14 जून 2020 को मुंबई स्थित उनके आवास पर हुआ था। उनकी मौत के बाद से ही यह मामला लंबे समय तक सार्वजनिक चर्चा और जांच का विषय बना रहा है। अब श्वेता के नए दावों के बाद एक बार फिर लोगों की नजर इस बात पर है कि क्या इन दावों के समर्थन में कोई नया आधिकारिक या स्वतंत्र प्रमाण सामने आता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि श्वेता सिंह कीर्ति ने जो बातें कही हैं, वे उनके द्वारा साझा की गई जानकारी और दावों पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें अंतिम निष्कर्ष के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
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