S&P Global की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, अगले वित्त वर्ष यानी 2026-27 में आर्थिक विकास दर थोड़ी कम होकर करीब 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर लगातार बनी हुई अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। अमेरिका के ऊंचे टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलती परिस्थितियों के बीच भी घरेलू आर्थिक गतिविधियों ने विकास को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब सवाल यह है कि अगले चरण में भारत अपनी आर्थिक विकास की रफ्तार को कैसे बनाए रखेगा। S&P Global के मुताबिक, आने वाले समय में भारत के विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, मजबूत कैपिटल मार्केट और बेहतर वित्तीय मध्यस्थता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो सड़क, रेलवे, बंदरगाह, बिजली, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में निवेश से आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से कारोबार की लागत कम करने और देश के अलग-अलग हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ने में भी मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट में कैपिटल मार्केट को और गहरा करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। मजबूत पूंजी बाजार कंपनियों को कारोबार बढ़ाने के लिए पूंजी जुटाने के अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकते हैं। इसके साथ ही वित्तीय क्षेत्र की बेहतर मध्यस्थता से बचत को निवेश तक पहुंचाने की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकता है।
S&P Global के मुताबिक, भारत के सामने चुनौती सिर्फ तेज आर्थिक वृद्धि हासिल करने की नहीं, बल्कि इस वृद्धि को लंबे समय तक बनाए रखने की भी है। इसके लिए मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता को लगातार मजबूत आर्थिक गतिविधियों में बदलना महत्वपूर्ण होगा।
वैश्विक अनिश्चितता भी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बदलाव, टैरिफ, वैश्विक मांग और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ऐसे माहौल में घरेलू मांग और निवेश को मजबूत बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। भारत की बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था उसे वैश्विक परिस्थितियों के बीच एक आधार देती है, लेकिन लंबे समय तक तेज विकास के लिए उत्पादकता, निवेश और रोजगार के अवसरों में वृद्धि भी जरूरी होगी।
रिपोर्ट में ऊर्जा सुरक्षा पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के बीच भारत के लिए स्थिर और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऊर्जा की कीमतों और उपलब्धता का सीधा असर उद्योग, परिवहन और घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
कुल मिलाकर, S&P Global के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर करीब 7 प्रतिशत रह सकती है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के 7.8 प्रतिशत के अनुमानित स्तर से कम होगी, लेकिन फिर भी आर्थिक गतिविधियों की मजबूत गति को दर्शाती है।
अब भारत के सामने चुनौती इस विकास दर को सिर्फ एक साल तक बनाए रखने की नहीं, बल्कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, गहरे कैपिटल मार्केट, बेहतर वित्तीय व्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के जरिए लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने की है।
![]()



