Thursday, November 5, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशजनसुनवाई व्यवस्था को लेकर डीएम का सख्त रुख, अधिकारियों को चेतावनी

जनसुनवाई व्यवस्था को लेकर डीएम का सख्त रुख, अधिकारियों को चेतावनी

जनसुनवाई में लापरवाही पर सख्त हुए जिलाधिकारी, अधिकारियों को कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश

मिर्ज़ापुर मनीष पाण्डेय 

मीरजापुर। जनसामान्य की शिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने सभी जनपदीय अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक कार्य दिवस में पूर्वाह्न 10 बजे से 12 बजे तक सभी अधिकारी अपने-अपने कार्यालय कक्ष में उपस्थित रहकर आमजन की समस्याएं सुनें और उनका समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि शासन की ओर से पहले ही सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है कि वे निर्धारित समय में जनसुनवाई कर जनता की शिकायतों का निस्तारण करें। इसके बावजूद यह देखने में आया है कि कुछ अधिकारी जनसुनवाई के निर्धारित समय में कार्यालय छोड़कर अन्य कार्यों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे कार्य जनसुनवाई अवधि के बाद भी किए जा सकते हैं, लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

जिलाधिकारी ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह व्यवस्था किसी भी स्थिति में संतोषजनक नहीं है। शासन की मंशा है कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए अधिकारियों की निर्धारित समय पर उपस्थिति अनिवार्य है।

उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रतिदिन पूर्वाह्न 10 बजे से 12 बजे तक अपने कार्यालय कक्ष में स्वयं मौजूद रहें तथा आमजन की शिकायतों को गंभीरता से सुनें। साथ ही प्राप्त शिकायतों का नियमानुसार और निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने कहा कि जनसुनवाई शासन की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है। यदि अधिकारी निर्धारित समय में जनता की समस्याओं को सुनेंगे और उनका प्रभावी समाधान करेंगे तो शासन की मंशा पूरी होगी तथा आम लोगों को योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।

उन्होंने सभी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शासनादेश का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। जनसुनवाई में किसी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन की जवाबदेही जनता के प्रति है और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण ही सुशासन की पहचान है।

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